अपने ही दम-खम पर दहकता और चमकता है
सूरज किसीका मोहताज नहीं खुद ही दहकता है!
रंगो-बू नहीं किसी इन्सान के लिबास में ज़ाहिद
मशक़्क़त करने वालों का ही किरदार महकता है!
-एन. आर. कस्वाँ