विज्ञापन

जरूरत

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देखी न सुनी ऐसी अदा ओ आदत साथ रहकर फ़ासले जताने की
        
                                                    
                            
यूं दूर ही रहना था तो आख़िर ज़रूरत क्या थी इतने पास आने की!
कसूर किस का है हम में से हबीब पता नहीं मग़र इतना तो तय है
ज़रूरत तुम्हें भी ज़रूरत हमें भी है फुर्क़त में भी राब्ते निभाने की!
- एन. आर. कस्वाँ
14 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Sarthak Piyush

28 कविताएं

View Profile

Nidhhi Mukesh

22 कविताएं

View Profile