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जैसे बीज वैसी फसल

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मसर्रत में हंसेंगे और मुसीबत में रोएंगे
        
                                                    
                            
हम वही फसल काटेंगे जैसे बीज बोएंगे
इरादे साफ़ सफ्फाफ और पाक हों तो
लोगों को आप नहीं लोग आपको खोएंगे
-एन आर कस्वाँ
3 महीने पहले
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