मसर्रत में हंसेंगे और मुसीबत में रोएंगे
हम वही फसल काटेंगे जैसे बीज बोएंगे
इरादे साफ़ सफ्फाफ और पाक हों तो
लोगों को आप नहीं लोग आपको खोएंगे
-एन आर कस्वाँ
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