विज्ञापन

फूलों से चोट

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत गुमाँ था हम को अपने यक़ीन पर कि
        
                                                    
                            
दश्त-ए-हयात में कांटों से बचकर निकल जाएंगे!
हमको नहीं था यह मालूम मग़र कि सींचा है
जिनको बड़े चाव से उन फूलों से ही चोट खाएंगे!
-एन. आर. कस्वाँ
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prem Chandra

2 कविताएं

View Profile

1 कविता

View Profile

1 कविता

View Profile

1 कविता

View Profile

1 कविता

View Profile