बहुत गुमाँ था हम को अपने यक़ीन पर कि
दश्त-ए-हयात में कांटों से बचकर निकल जाएंगे!
हमको नहीं था यह मालूम मग़र कि सींचा है
जिनको बड़े चाव से उन फूलों से ही चोट खाएंगे!
-एन. आर. कस्वाँ
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