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बेग़ैरत

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गैरों के सुकूँ से परेशाँ होने वालों में कहां ग़ैरत होती है
        
                                                    
                            
हम को तो उन की इस बे- ग़ैरत पर बड़ी हैरत होती है

तकल्लुफ़ नहीं उनको किसी के सुकूने- क़ल्ब के लिए
फ़िजूल की शय उनके लिए ये सब ग़ैरत-वैरत होती है

डॉ. एन. आर. कस्वाँ
2 महीने पहले
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