गैरों के सुकूँ से परेशाँ होने वालों में कहां ग़ैरत होती है
हम को तो उन की इस बे- ग़ैरत पर बड़ी हैरत होती है
तकल्लुफ़ नहीं उनको किसी के सुकूने- क़ल्ब के लिए
फ़िजूल की शय उनके लिए ये सब ग़ैरत-वैरत होती है
डॉ. एन. आर. कस्वाँ
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