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अगर नही जानते

Narender रावत

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कैसे घुटे बन्द कमरों में जीवन
        
                                                    
                            
ले के चलता है आशा
बेहतर जिंदगी की
सहता है तापमान के उत्तर चढ़ाव
नापता है देह के घटते वज़न से
सफ़ल होने की संभावना
लेता है शरण दरकती बिल्डिगों में
ताकि खींच सके कुछ और मोहलत
भूख के जबड़ों से
टिक सके परीक्षा के दिन तक
बड़े शहर में
अगर नही जानते तुम
उस युवा के फैसलों के पीछे का अर्थशास्त्र
तो इस देश के नही हो तुम
क़ाबिज़ हो देश पर परजीवी के समान
अगली पीढ़ी की लड़ाई तुम से ही है ।
- नरेन्द
एक महीने पहले
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