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मरने के बाद

Naik prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी शव पड़ी है जमीन मे बिछी दरी पर
        
                                                    
                            
प्राण शरीर निकल गये हैं पर घुम रही है
घर कोने-कोने घुम कर सब देख रही थी
जिस कमरे में शव था मेरी पत्नि बैठी थी
आंख के आंसू बह-बह कर सूख चुकी थी
कमरे में अगरबत्ती गुच्छे में जल रही थी
खबर चारों दिशाओं में वायरल हो गई थी
परिवार के लोग शव की अंतिम बिदाई
की तैयारी पुरजोर तरिके कर रहे थे
परिवार के सभी लोग एकत्रित हो गए थे
हमारे पड़ोसी शर्मा सर्व प्रथम आए
पर स्वभाव के विपरित कमरे गये
शव को प्रणाम किया दुखी जरुर थे
क्योंकि कल से शिकायत किससे करेगें
लड़ाई -झगड़ा किससे करेगें
मेरे प्रिय मित्र वर्मा जी आए
और जमीन पड़े शव के पास जा कर
अत्यंत दुखी मन से शव प्रणाम किए
और मेरी पत्नि से बोले कि मेरा दोस्त हिरा था
मैं आपको कैसे धैर्य दिलाऊं?
मैं खुद विचलित हूं, दोस्त के आंसू टपक पड़े
मुझे हमेशा गर्व रहा कि वर्मा दोस्त रहा
पंडित जी आ गये धे
बाहर अर्थी सज गई धी
पंडित जी मंत्रों के उच्चारण के साथ
अर्थी पर लिटा दिया गया
परिवार के सदस्यों के रुदन से
घर-गलियारा गूंज उठा
घर के बाहर गलियारे अर्थी लाई गई
बाहर में बहुत सारे परिचित चेहरे थे
मैं खुश था कि कुछ गरीब लोग भी खड़े थे
जिन्हें मैं समय-समय आर्थिक सहायता किए धे
आखिर में यमदूत बोला कि
इससे आगे का दृश्य नहीं दिखा सकता
तुम्हारे प्राण यमराज के पास ले जाना है
3 महीने पहले
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