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मानव और दानव

Naik prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नम्रता एक आदर्श मानवीय अंलकार है
        
                                                    
                            
जिस मानव में नम्रता नहीं है
उसमें मानवता नहीं है
मानवता से मानव का निर्माण हुआ है
यही तो विभक्त करता है मानव और दानव में
इस युग में बनावट में कोई अंतर नहीं मानव और दानव में
इसलिए गुण के आधार पर
अंतर करना पड़ता मानव और दानव में
कोई भी मानव संपूर्णरुप मानव नहीं होता है
कुछ गुण दानव के, मानव में मौजूद रहते हैं
या यह भी कह सकते हैं कि
दानव में मानव के गुण मौजूद हो सकते हैं
अब यह निष्कर्ष निकलता है कि
मनुष्य गुणों के अनुसार मानव अथवा दानव हो सकते हैं
3 महीने पहले
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