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जय मां काली

Naik prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जय मां कलकत्ते वाली
        
                                                    
                            
तेरा वचन जाए खाली
हिल गया अत्याचार एक रात
रण्डचंडी ने हाथ में थामी.
प्रलयंकारी न्याय की सौगात
मुंडा गले में सोहे
खप्पर और कृपाण सजे
अंधर्मी का अंत का
अब चारो ओर नगाड़ा बजे
थरूर थर कांपी पाप की दुनिया
जब हुंकार भरी माता ने
मिट गया अंधकार जगत का श
जोत जलाइ विधाता ने
- भागवत प्रसाद नायक
4 महीने पहले
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