फट गई धरती मां का आंचल रसातल में चला गया जल स्तर
पेड़- पौधे सूख गये ,पशु- पक्षी तड़प कर गिर रहें धरती पर
तड़प रही हैं मछलियां तालों पर, मेढक मांग रहे जल
अब तो तरस खाओ धरती के जीवों पर
अब तो बरसो बादल, बरसो बादल
प्रातःकाल सूरज निकलते ही आग बरसाता है
धरती पर कहीं चैन नहीं एसी कूलर सब थक गये हैं
पंखा आग बरसाता है, अब पेड़ का छांव नहीं है
हमारे तो हलक सूख गए, कहां से पायेगें पानी
अब तो मत तरसाओ, अब बरसो बादल रानी