विज्ञापन

बरसो बादल

Naik prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फट गई धरती मां का आंचल रसातल में चला गया जल स्तर
        
                                                    
                            
पेड़- पौधे सूख गये ,पशु- पक्षी तड़प कर गिर रहें धरती पर
तड़प रही हैं मछलियां तालों पर, मेढक मांग रहे जल
अब तो तरस खाओ धरती के जीवों पर
अब तो बरसो बादल, बरसो बादल
प्रातःकाल सूरज निकलते ही आग बरसाता है
धरती पर कहीं चैन नहीं एसी कूलर सब थक गये हैं
पंखा आग बरसाता है, अब पेड़ का छांव नहीं है
हमारे तो हलक सूख गए, कहां से पायेगें पानी
अब तो मत तरसाओ, अब बरसो बादल रानी
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nidhhi Mukesh

22 कविताएं

View Profile

Sarthak Piyush

28 कविताएं

View Profile