विज्ञापन

आओ मनाए होली

Naik prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आओ मनाएं होली
        
                                                    
                            
आओ मेरे हमजोली
हमजोली खेलेगी होली
रंग-बिरंगी होली
तन के तह तक छुपे अंग
छृए होली का चटक रंग
बदन तर-बतर काया
उभरे हृदय के लगे चुटिले अंग
रक्ताभ से अंग-अंग
छुपे चटक लाल अंग-अंग
जो होठौं लगाए जा सकतें हैं
एक सुंदर मखमली कपोल
दूसरा चटक लाल ओंठ
तीसरा एक अत्यंत गोपनीय अंग-अंग
होली का रंग तर-बतर वह अंग-अंग
बहुत उत्तेजित हो जातें नर का अंग
नर-नारी ईश्वर प्रदत्त दोनों का अंग
जब होली भांग चढे
रंगों नशा भी खूब चढाई
पुरुष का वो अंग.खड़ा हुआ एकदम
पुरुष पर सवार हुआ नशा भंग का
उत्तेजित नारी अपना आपा खोती है
तब हो जाता है नर - नारी का संगम
यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया
ईश्वर प्रदत्त अंग हैं
संगम भी प्राकृतिक है
संयम एक बड़ा अस्त्र है
जो इसकी काट है
सजग रहिये, सजग रहिये
इस तरह प्राकृतिक देन से बचिए
धूम मचाने की हे होली
आओ मनाएं होली
ए मेरे हमजोली
- भागवत प्रसाद नायक
5 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10278 कविताएं

View Profile