शब्दों में क्योंकर तारीफ करुं आपकी?
आपको शब्दों में कहीं बान्ध पायेंगें।
कभी हमारी ऑखों में झांक कर देखो. ,
हजारों अलफाज खुद-ब- खुद बिखर जायेंगें ।
- भागवत प्रसाद नायक