विज्ञापन

भारत में भगदड़

NAGMANI KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी मंदिरों में,
        
                                                    
                            
कभी नदी के तटों पर,
कभी रैली में,
तो कभी बाबा के दरबार।
भगदड होती है,
लोग मरते हैं,
नेता आते हैं,
मुआवजा की घोषणा करते है,
जांच बैठती हैं,
कारवाई होती हैं,
फिर भगदड होती है।
न आस्था खत्म होती हैं।
न सिस्टम ठीक होती है,
न खत्म होनी वाली
कहानी लगती है।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all