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शीर्षक - छल फरेब स्वार्थ

N manglam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शब्दों के साथ ही जीवन होता हैं।
        
                                                    
                            
छल फरेब स्वार्थ हम सब रखते हैं।

हम सब एक-दूसरे को समझते हैं।
सच हमारे छल फरेब स्वार्थ होते हैं।

जिंदगी में सच क्या हम न जानते हैं।
पल पल उम्र हम सब को कहतीं हैं।

छल फरेब स्वार्थ के साथ जिंदगी है।
हम न तब तुम से न उम्मीद रखते हैं।

ईश्वर कुदरत सब कुछ देखते रहते हैं।
हर लम्हा और हालात हमें जीते हैं।

कर्म और धर्म का फल हम भोगते हैं।
नीरज शब्दों में एक सच लिखते हैं।

छल फरेब स्वार्थ हम सब छोड़ते हैं।
एक दूसरे को सहयोग हम करते हैं।

समूह शहर और गांव हम रहते हैं।
मिलते-जुलते और कदम बढ़ाते हैं।

छल फरेब स्वार्थ की राह छोड़ते हैं।
आओ मिलकर हम सब सोचते हैं।
 
8 घंटे पहले
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