विज्ञापन

शीर्षक - अबोध .... अनजान

N manglam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अबोध बालक हम सब होते है।
        
                                                    
                            
कुदरत के रंगमंच पर किरदार हैं।
अबोध हम सभी अपने विचार हैं।
प्रेम प्यार चाहत हम समझते हैं।
बस धोखे छल फरेब स्वार्थ हैं।
नीरज भी अबोध सच लिखते हैं।
एहसास और एतबार अबोध हैं।
तेरे मन भाव में हम तुम होते हैं।
एक-दूसरे को अबोध बन जाते हैं।
जीवन के साथ हम तुम चलते हैं।
सब मोह माया बस संग साथ हैं।
हर एक कभी न कभी अबोध हैं।
सच एक दूसरे को हम समझते हैं
आओ हम सब फिर अबोध बनते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all