नन्हा पौधा बोला मुस्काकर ,
मुझको रोपो प्यार से आकर।
मैं बन जाऊँगा वृक्ष बड़ा,
मुस्काओगे छाया पाकर।
धूप में शीतल छाया दूँगा,
मीठे फल खिलाया करूँगा,
गीत गाएंगे पंछी आकर,
बच्चों को झूले झुलाया करुँगा।
हरियाली का मैं हूँ साथी
धरती माँ की सच्ची थाती।
आओ मिलकर शपथ उठाएँ,
हर उत्सव पर पौधा लगाएँ।
पौधे हैं जीवन की शान,
इनसे बढ़ता देश का मान।
एक-एक पौधा जब लगाएँ
हरा-भरा संसार बनाएँ।