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ममता की मूरत

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्नेह की धारा है नारी ,
        
                                                    
                            
जग का उजियारा है नारी,
माँ बन ममता बरसाए कभी ,
बहन बन प्यार लुटाए नारी ।

पत्नी बन कभी साथ निभाती,
दुख-सुख में सदा है मुस्काती,
बन कर बेटी घर को महकाती,
खुशियों की बगिया बन जाती।

शिक्षक बन कभी वह ज्ञान दे,
वीर बन कभी वह सम्मान दे,
हर रूप में घर का स्वाभिमान है ,
नारी से ही जग की शान है ।

नारी तुम ही शक्ति की सूरत हो,
नारी तुम ही भक्ति की मूरत हो,
तुम बिन सूना है आँगन सारा,
तुम ही सृष्टि खूबसूरत हो ।
-मोहन लाल रेगर

 
6 महीने पहले
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