काट कर जंगल सभी
चिमनियां हैं उगाय
अब क्यों 45 डिग्री में
हाय गर्मी तू चिल्लाय
गाड़ी नहाय रोज lux से
खुद शाॅवर में दो बार नहाय
पोत दी कालिख नदियों पर
Sprite क्यों प्यास बुझाय
बेडरूम से बाथरूम तक
Audi में ही बैठकर जाय
पर्यावरण बचाओ का नारा
अब दीवार पर चिपकाय
केमिकल डाले मिट्टी में तू
तोरई का कद्दू है बन जाय
खूब खाए MDH डालकर
अब क्यों लिवर बदलवाय
दहेज के एसी, फ्रिज में
ठंडा - ठंडा कूल हो जाय
कर नाश ओजोन का अब
lekme सन क्रीम लगाय
हजारों वार प्रकृति पर तेरे
तू एक में ही धूल चाट जाय
बाढ़, अकाल, सूखा, ताप
अब तो दिमाग की बत्ती जलाय
- मुनेश भारद्वाज