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अब क्यों

munesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब क्यों
        
                                                    
                            

काट कर जंगल सभी
चिमनियां हैं उगाय
अब क्यों 45 डिग्री में
हाय गर्मी तू चिल्लाय

गाड़ी नहाय रोज lux से
खुद शाॅवर में दो बार नहाय
पोत दी कालिख नदियों पर
Sprite क्यों प्यास बुझाय

बेडरूम से बाथरूम तक
Audi में ही बैठकर जाय
पर्यावरण बचाओ का नारा
अब दीवार पर चिपकाय

केमिकल डाले मिट्टी में तू
तोरई का कद्दू है बन जाय
खूब खाए MDH डालकर
अब क्यों लिवर बदलवाय

दहेज के एसी, फ्रिज में
ठंडा - ठंडा कूल हो जाय
कर नाश ओजोन का अब
lekme सन क्रीम लगाय

हजारों वार प्रकृति पर तेरे
तू एक में ही धूल चाट जाय
बाढ़, अकाल, सूखा, ताप
अब तो दिमाग की बत्ती जलाय

- मुनेश भारद्वाज
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4 वर्ष पहले
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