विज्ञापन

प्रशिक्षु शिक्षक का सफ़रl

Muneer Shamee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ दिन का रिश्ता, उम्र भर की यादें
        
                                                    
                            
कुछ दिनों के लिए विद्यालय में आते हैं,
पर न जाने क्यों, सबके अपने बन जाते हैं।

बच्चों की मुस्कान में अपनी ख़ुशी खोजते हैं,
उनकी छोटी-छोटी सफलताओं पर गर्व करते हैं।
कभी प्यार से समझाते, कभी गलती सुधारते हैं,
कभी बच्चों के साथ हँसते, कभी उन्हें सँवारते हैं।

फिर एक दिन प्रशिक्षण का समय भी बीत जाएगा,
पर इन बच्चों का अपनापन बहुत याद आएगा।
जो शिक्षक बनकर आते हैं, वे केवल पढ़ाते नहीं,
वे बच्चों के जीवन में यादों के फूल भी खिलाते हैंl

आज जो कक्षा में बच्चों को पढ़ाते हैं,
कल शायद किसी नई राह पर बढ़ जाएँगे।
जिन चेहरों पर आज मुस्कान सजाते हैं,
उन्हीं चेहरों को याद करके कभी मुस्कुराएँगे।

ब्लैकबोर्ड पर लिखे शब्द मिट जाएँगे,
पर मन में अंकित अनुभव कहाँ मिट पाएँगे?
विद्यालय की गलियों में बिताए वे पल,
जीवन की किताब में बन जाएँगे अमर संबल।

प्रशिक्षण की अवधि समाप्त हो जाएगी,
पर बच्चों से जुड़ी आत्मीयता कहाँ समाप्त हो पाएगी?
-मुनीर शमी
 
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajesh Ranjan

2 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10845 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7356 कविताएं

View Profile