विज्ञापन

अपना वसंत स्वयं रचो...

Mukesh kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर कली अपने भीतर एक संभावना रखती है,
        
                                                    
                            
फर्क बस इतना है कि
कुछ को वसंत मिलता है,
और कुछ को अपना वसंत स्वयं बनाना पड़ता है...

हर कली के भीतर
एक अनकही कहानी छिपी होती है,
एक नया आकाश छूने की
एक छोटी-सी संभावना होती है।

कुछ कलियों को ऋतु का साथ मिलता है,
कुछ को धूप में तपकर खिलना पड़ता है।
कुछ को वसंत विरासत में मिलता है,
और कुछ को अपने हाथों से
अपना वसंत रचना पड़ता है।

रास्ते चाहे काँटों से भरे हों,
मौसम चाहे कितना भी प्रतिकूल हो,
एक बीज के भीतर भी
पूरा वन बनने का साहस होता है।

क्योंकि बदलाव
बाहर की ऋतुओं से नहीं,
अंदर की इच्छाशक्ति से जन्म लेता है।

पतझड़ चाहे जितना लंबा हो,
एक नई सुबह का जन्म निश्चित होता है,
बस आवश्यकता है विश्वास की,
धैर्य की और निरंतर प्रयास की।

इसलिए प्रतीक्षा मत करो
किसी सुनहरे मौसम की...
अपने सपनों को सींचो,
अपने प्रयासों को पंख दो,
और अपनी आत्मा की मिट्टी में
अपने विश्वास का बीज बोकर
अपना वसंत स्वयं रचो। 
22 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile