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माँ-बाप का दिल मत तोड़ना

Motiur Rahman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने चंद लम्हों की ख़ुशी, नफ़्स की ग़ुलामी में ,
        
                                                    
                            
क़ानून-ए-शरीयत तोड़ देते हो।

दुनिया, बीवी-बच्चों की मोहब्बत में,
माँ-बाप को तन्हा छोड़ देते हो।

अपने महबूब की मोहब्बत में चाँद-तारे तोड़ने वालों,
माँ कुछ मना कर दे करने से, तो घर के बर्तन तोड़ देते हो।

अबे कम्बख़्त! जिनको ‘उफ़’ तक कहना मना हो,
तुम अपने घमंड में, सनक में, उनका दिल तोड़ देते हो।

और तुम उनकी नाफ़रमानियाँ, वादे और हुक़ूक़ तोड़कर,
अपने ही करतूत के हाथों, अपना सिरात-ए-पुल तोड़ देते हो।
- मोतिउर रहमान
3 घंटे पहले
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