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देखो देश बदल रहा है

monika yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देखो देश बदल रहा है।
        
                                                    
                            
क्या झूठ कहा मैंने?
अरे...ये तो जल रहा है
न जाने कैसा दौर चल रहा है?
पर सच है! देश बदल रहा है।
शिक्षा का व्यापार चल रहा है
बेरोजगार पकौड़े खाकर पल रहा है
और तुम हो कहते धंधा मंदा चल रहा है?
थोड़ा गौर करो भाई! देश का सोचो...
देश बदल रहा है।
तुम पागल कहाँ बहन-बेटी पे अटके हो
यहाँ गौ माता के लिए भाई-भाई लड़ रहा है
भगवान का भी बटवारा साथ में चल रहा है
तुम बेचारे नादान क्या मालूम तुमको
देश बदल रहा है।
खबरों का जरिया अब बिक रहा है
नोटो की लौ पर सच सिक रहा है
इंसानियत का लिबास पहने क्या कोई तुमको दिख रहा है?
सुनो बुरा न मानना, वो क्या है ना
मेरा देश बदल रहा है।
अच्छा-खासा परिवार जहर खाकर मर रहा है
लाचार किसान खाली पेट मिलों चल रहा है
क्या फर्क पड़ता है, गरीब है अपने कर्म बसर कर रहा है
मत सोचो इनका, इधर देखो दोस्त
देश बदल रहा है।
500 रूपये में ताजा सासों का मौका हमें मिल रहा है
रोज नया चर्चा का विषय खुल रहा है
इससे याद आया चाय का खर्चा काफी बढ़ रहा है
शायद इसलिए ये चायवाला नजरों में चढ़ रहा है
माफ करना मुझे, वैसे तुमको क्यों खल रहा है?
देश बदल रहा है।
सच का सिर सड़कों पर सढ़ रहा है
सत्ता का धड़ बेखौफ बढ़ रहा है
कानून! अरे वो तो मासूमो पर लाठियां जड़ रहा है
तुम कहाँ इन सब मे फसें हो
ध्यान दो, देश बदल रहा है।
ये क्या जीडीपी के चक्करों में पढे़ हो
इससे कौन सा अपना दाल-चावल चल रहा है
और प्याज वो भी छोड़ो, मंहगाई का दौर है
चुप रहो और देखना सुनना बंद करो सब ठीकठाक चल रहा है
बस याद रखो, देश बदल रहा है....


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6 वर्ष पहले
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