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सजदा करना ही पड़ेगा

Mohit Poonam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इबारत लिखने का हुनर सबको कहाँ नसीब होता है,
        
                                                    
                            
हमने तो साधारण हरफ़ों से भी इतिहास लिख दिया।
कल भी झुकते थे वो, फ़र्क़ बस इतना है
तब अदब में झुकते थे, आज सजदा करते हैं।
और कुछ लोग ऐसे भी हैं,
जिनकी तक़दीर हमने भीख में लिख दी थी;
वो आज भी इस वहम में जीते हैं
कि सब कुछ उन्हें अपनी किस्मत से मिला है।
- मोहित पूनम रंजन
2 महीने पहले
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