आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सजदा करना ही पड़ेगा

                
                                                         
                            इबारत लिखने का हुनर सबको कहाँ नसीब होता है,
                                                                 
                            
हमने तो साधारण हरफ़ों से भी इतिहास लिख दिया।
कल भी झुकते थे वो, फ़र्क़ बस इतना है
तब अदब में झुकते थे, आज सजदा करते हैं।
और कुछ लोग ऐसे भी हैं,
जिनकी तक़दीर हमने भीख में लिख दी थी;
वो आज भी इस वहम में जीते हैं
कि सब कुछ उन्हें अपनी किस्मत से मिला है।
- मोहित पूनम रंजन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर