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एक सवेर सही

Mohit Kaushik

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत हो चुका अंधियारा अब एक सवेर सही
        
                                                    
                            
इन ग़मों में खुशियां चाहिए कुछ देर सही कुछ देर सही
मंज़िल ख़ुद ही तय करूंगा मुझको चलना सिखला दो
छू लूंगा मैं आसमा भी बस उड़ने का हुनर बता दो
एक मिले उम्मीद की चिंगारीॉ
बस एक मिले उम्मीद की चिंगारी
फिर सारी उम्र राख का ढेर सही
बहुत हो चुका अंधियारा अब एक सवेर सही
इन ग़मों में खुशियां चाहिए कुछ देर सही कुछ देर सही

- मोहित कौशिक

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6 वर्ष पहले
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