नित नए सपने दिखाता
हर दम नई आशा जगाता
जो कभी ना हारने दे
प्रेम ऐसा वो निभाता
पूरी इज्ज़त से नवाता
प्रेम की वो बोले भाषा
मीठी वाणी मुख से निकले
है जगत का वह विधाता
उम्मीद का सूरज दिखाता
संग मेहनत खूब कराता
सबको पसीने में ड़ूबा कर
प्रेम की रोटी खिलाता
दर्द भी सबका बढ़ाता
सहने की हिम्मत जगाता
मन भ्रमित ना हो किसी का
ऐसी ऊर्जा से नवाता
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