नन्हे मुन्ने ओढ़ रजाई
ठंडी बिलकुल तेज है आयी
तेरी पहली सर्दी है ये
छुप जा मम्मी की गोद मे भाई
जुते मोजे से लैस रहा कर
गर्म कपड़ों में पैक रहा कर
इंडोर खेल ही खेला कर तू
जब तक ठंड़क चली ना जाये
घर का राज दुलारा है तू
सबकी आँख का तारा है तू
मन सबका बस तुझसे रमता
भाई मेरा प्यारा है तू
बाहर की ज़िद ना करना बिलकुल
घर में खेल अनोखे खेलो
प्यार दुलार मिलेगा सबसे
टाइम पर गर दूध पिलो
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।