मैं मर जाऊँ य़ा मिट जाऊँ
मेरा खून मिला है इस मिट्टी में
जीते जी कुछ कर जाऊँ
दिल रहता है इसी ज़िद्दी में
देश प्रेम का अलख जगा कर
रख रक्खा य़ारों सीने में
कुछ कर जाने की फिक्र मुझे है
यारो इसी महीने में।