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मैं मर जाऊँ य़ा मिट जाऊँ

MOHD TASVIRUL ISLAM

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं मर जाऊँ य़ा मिट जाऊँ
        
                                                    
                            
मेरा खून मिला है इस मिट्टी में
जीते जी कुछ कर जाऊँ
दिल रहता है इसी ज़िद्दी में
देश प्रेम का अलख जगा कर
रख रक्खा य़ारों सीने में
कुछ कर जाने की फिक्र मुझे है
यारो इसी महीने में।
4 वर्ष पहले
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