मैं किताब जिंदगी की,उल्फत से हूं भरी
जीना संग चाहती थी, पर मुझको मिला नहीं
मेरी सादगी को उसने, दिया इतना है निचोड
फिर भी मुझे सनम से, कोई गिला नहीं
चाहा था मैने ज़िसको मुझको मिला नहीं
उसकी ख़ुशी से मुझको कोई गिला नहीं
मेरे दर्द का ख्याल थोड़ा रख लिया होता
कुछ सुन लिया होता, कुछ कह दिया होता
मिट जाता कुछ मलाल, होता मैं खुशहाल
रहता दिल मे प्यार, थोड़ा संग चला होता
मेरी दुआयें तुझको, आबाद ही करेंगी
खुशियों से दामन, भरकर ही रहेंगी