कितना बदला है इंसान
कितना बदला है इंसान
अल्प ज्ञान का अपने करता
रहता खूब बखान
बात बात पर धर्म घूसेड़
करता है परेशान
बोले बस मेरा धर्म है अच्छा
बाकी सब बेजान
छोटी छोटी बात पे बोले
तुम हिन्दू तुम मुस्लिम
धर्म देख कर सोच जो बदले
फिर वो क्या ईमान
निहथ्थे पर भीड़ का आना
चाबुक का बस वार चलाना
जब तक जान हलक ना आये
करते लहुलुहान
नेता भी अब करने लगे हैं
बस भीड़ का सम्मान
कुर्सी की बस उनको चाहत
ना मानुष की जान
गाय के खातिर लड़ मर जावें
हल्ला का मानुष को फसावें
अल्प ज्ञान के ज्ञानी वक्ता
बने हुए विद्वान
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