एक सुन्दर सी लड़की थी यारों
घायल सी कर देती थी
मस्त जवानी उसकी मुझको
पागल सी कर देती थी
ऊँगली से ऊँगली को दबाना
अन्दाज मे वो मस्तानी थी
लड़की थी अल्हड़ भोली सी
पर मेरी दिलबर जानी थी
एक दिन अचानक मुझसे वो
यूँ ही आ टकरा गयी
हालत मेरी देख के वो
हंस के वो शर्मा गई
पगला कह कह कर वो मुझको
घायल ही कर देती थी
उसकी यादों से ये जीवन
महका और गुलज़ार हुआ
वो तो जीने मरने का अहसास
जवां कर देती थी
लड़की थी वो सीधी साधी
अन्दाज बड़ा कर देती थी
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