दो कदम चलते ही एहसास हो गया
प्यार के इरादों का आभास हो गया
सोचता था जान मैं दे दूँगा प्यार में
साथ देने का वादा कर दूर हो गया
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।