बन पंछी उन्मुक्त गगन में उड़ता जा तू उड़ता जा
मंजिल को पहचान कर बच्चे आगे आगे बढ़ता जा
कर्म किये जा मेहनत से बिन फल की इच्छा किये हुए
ईश्वर का जब मन हो देगा तुझको छप्पर फाड़ के
नभ तल में तू विचरण कर किवदंती बन काम कर
लक्ष्य साध कर जीवन के हर मुश्किल को आसान कर
विश्व परिधि मे तेरा डंका जब तक डम डम नहीं बजे
तन मन धन से लोगो की सेवा का सत् मार्ग बन
स्वच्छ रहे ये प्यारी धरती खुशियां बिखरे चारों ओर
हरे भरे सुन्दर पेड़ों के संग पंछी का मनमोहक शोर
हरियाली से लदी हो धरती प्राण वायु से सजी रहे
बादल गरजे पानी बरसे हो मनभावन नाचे मोर
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