बड़ी कशमकश है ज़िन्दगी मे मेरी
नींद आती रही और मैं सो ना सका
ज़िम्मेदारी मेरे कान्धो पर पड़ी
उलझनो से मैं खुद को बचा ना सका
है ये क्या तरबियत मुझको मालम नहीं
उम्मीदों से जी मैं चुरा ना सका
दोस्तों की फिकर थी मुझे तो बहुत
एक अल्फाज दिल से लगा ना सका
प्यार करता बहुत था मैं उनसे मगर
एक आवाज दिल की लगा ना सका
सोचता था की माँ बाप का मैं सवारूं दिल
कर्ज मैं दूध का उनका हटा ना सका
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