वो इश्क इश्क चिल्लाता था
बस अपनी बात बताता था
जब दिल टूटा तो पता चला
वो उल्लू बहुत बनाता था
सच से ना कोई नाता था
बनता बड़ा विधाता था
इश्क मे पूरा जीरो था
पर खुद को कहता हीरो था
वाणी से मीठी बातें निरझर
पर मन का कुटिल सरोवर था
बस अपनी धुन मे रहने वाला
वो जुल्मी दिल का मोहर था
खुद को ज्ञानी बतलाता था
प्रेम का बने विधाता था
मतलब अपना पूरा कर वो
अजनबी तुरंत बन जाता था
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