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मां-देवी है, मां-ममता है

mohar singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मां देवी है, मां ममता है, मां है महान
        
                                                    
                            
मां ने मुझे जन्म, दिया यह जहान
उस परम ब्रह्म की सबसे खूबसूरत रचना है मां
मां से सुंदर ब्रह्म ने भी
और कुछ बनाना चाहा ना

"मेरी-मां मेरी-रूह है"
ममता जिसकी अपरिभाषी है
मां के लिए सपूत सभी समान है
चाहे वह रावण हो
या फिर राम जैसा कोई बनवासी है

मां ने अपने रक्त से हमको अंकुरित किया
अपने दूध से हमको सींचा है
फिर हाथ पकड़ कर चलना सिखाया
और ना समझने पर कान भी खींचा है

ऐ बंदो मां के चरणों में वो आशीर्वाद है
जो पूरी करती हमारी हर फ़रियाद है
जन्म देकर कहती मैयां बच्चा मेरा फ़ौलाद है
पर कहे "मोहर" फ़ौलाद हम नहीं
वह मां होती है जिसकी हम औलाद है

मां दया का वो सागर है
गहराई जिसकी अपार है
मां का आंचल सभी सुखों से परिपूर्ण है
मां दुनिया में हर जीवन का आधार है

मां तूने मुझे जिंदगी दी जो तेरी तरह प्यारी है
मां तूने मुझे जो सीख दी याद वो मुझको सारी है
ऐ बंदो मां ने हमको बड़े लाड़ प्यार से बड़ा किया
और स्वयं बूढ़ी हो गई
उसके थरथराते क़दमों की लाठी हमको बनना है
क्योंकि सेवा की अब बारी हमारी है
-मोहर सिंह
7 महीने पहले
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