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लालच बुरी चीज़ है

Mohammad Arif

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तलवे चाटने की आदत नहीं अपनी किसी साहूकार की जनाब, नहीं तो कब के संवर जाता।
        
                                                    
                            
सच बोलता हूँ मैं साहब कोई झूट नहीं, ज़मीर अपना बेचा होता तो कबके अमीर बन जाता।।

मेहनतकशी और फ़राख़ दिली मेरी फ़ितरत में है आरिफ़, हरामखोरी मुझे आती नहीं।
सच्चा हूँ इमानदारी से कमाता हूँ जो ये ख़ुद्दारी जाती नहीं, ये बिका होता तो मैं कबके मर जाता।।

-मोहम्मद आरिफ़ इलाहाबादी


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7 वर्ष पहले
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Ramesh Raj

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