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लड़की कौन होती हैं

Mithun kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लड़की कौन होती है
        
                                                    
                            
लड़की मौन रहती है।
न कुछ कहती है,
न कुछ कहलवाती है।
नजरें की बातों से
नजरें कह जाती हैं।
अपनी ही बातें से
पहली मुलाकातों से
अपनी ही व्यवहार समझाती है
कि लड़की हूँ मैं।
क्या पूछा कौन है मैं
हा लड़की हूँ मैं।
टूटे हुए सपनों का उजियारा हूँ मैं
बंद कमरे का अंधेरा छोड़
नए सदी का सवेरा हूं मैं
त्याग तपस्या का परिणाम हूँ मैं
सभी चुनौतियों के लिए
तूफ़ान हु मैं
क्या पूछते हो कौन हूँ मैं
हां लड़की हूँ मैं
अपने घर की पहचान हूँ मैं।
लड़की होने का अभिमान हूँ मैं।
नये युग की नई किताब हूँ मैं
हर पन्ने की एक पहचान हूँ मैं।
 
एक घंटा पहले
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