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नाराजगी

Misbah ul

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं दर्द की इंतहा पर हूं
        
                                                    
                            
मैं एक शख्स का बुलाया हुआ हूं

लोग मुझको गमगीन समझते हैं
मैं एक शख्स का सताया हुआ हूं

नहीं है मुझ पर कोई कर्जा
मैं हर रिश्ते को निभाया हुआ हूं

मैं लोगों से नहीं मिलता अक्सर
मैं एक राज को छुपाया हुआ हूं

मिस्बाह परवाह नहीं है रोशनी की
मैं एक शमा जलाया हुआ हूं...
2 वर्ष पहले
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