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चाह और सुकून

Milan Thakur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इंसान आराम चाहता है
        
                                                    
                            
आराम मिले तो और कमाना चाहता है
पुराने दिनों के लम्हे चाहता है
दोस्तों की यारी, करीब से जीना चाहता है
खैर चाहने से पूर्ति नहीं
इंसान बेवजह ही दुख-दर्द में जीना चाहता है, जीना चाहता है
5 घंटे पहले
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Shivam Awasthi

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