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ये गम जब ज़ियादा सताने लगे

meri shayari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये गम जब ज़ियादा सताने लगे
        
                                                    
                            
ख़ुशी के वो दिन याद आने लगे

उसे मैंने खोया है इक पल में ही
जिसे पाने में भी जमाने लगे

किसी ने ख़रीदा नहीं सस्ते में
वो फिर दिल की क़ीमत घटाने लगे

कई पेड़ जड़ से कटे हैं यहां
नई सड़कें जब हम बनाने लगे

हमारी वफ़ा रास आई नहीं
सितम ये वो ख़त भी जलाने लगे

वो शायद कभी लौट के आएँगे
यहीं सोच हम घर सजाने लगे

सिद्धार्थ सैनी ' साद '
3 वर्ष पहले
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