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नि:शब्द हो गई मैं…

Meenu Lodha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लिखने बैठी कविता ,
        
                                                    
                            
ज़ुबान पर आया न कोई शब्द
झरोखा खोल के देखा बाहर
सुनी बहारों की सरगम
हो गई मैं नि:शब्द…

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5 वर्ष पहले
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Sanjay

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