नारी शक्ति
ऐ नारी तू है जननी, तू है दुर्गा, तू ही लक्ष्मी और सरस्वती,
तुझ में है ब्रह्माण्ड की शक्ति सारी I
तू है प्रेम, दया और ममता की मूरत,
त्याग, बलिदान, समर्पण की तू है सूरत।
माँ, बेटी, बहन और पत्नी बनकर, सब रिशते प्यार से निभाती जीवन भर,
परिवार की ख़ुशी के लिऐ करती अनेको बालिदान, हर दुःख सहती हंसकर I
हिम्मत और साहस की बनी मिसाल, झाँसी की रानी बनकर,
चाँद पर भी जा पहुँची, कल्पना चावला बनकर,
देश भी संभालना आता तुमको, साबित किया इंदिरा गांधी बनकर,
भारत की शान बढ़ाई, मिस यूनिवर्स, मिस वर्ल्ड जैसे ताज दिलाकर,
खेल रतन भी दिलवाए तुमने, पी टी उषा, मेरी कोम जैसे ख़िलाड़ी बनकर,
देश विदेश में भी खूब नाम कमाय़ा, डॉक्टर, शिक्षक, वैज्ञानिक, अभिनेत्री और अफसर बनकर¬¬।
फिर क्यूँ आज भी इनको सहना पढता हर दिन इतना अत्याचार,
बेटे की चाह पढ़ जाती आज भी इनपर भारी, होती बेटी क्यूँ गर्भपात का शिकार।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बेटी को तुम हर क्षेत्र में आगे बढाओ,
ना काटो इसके पंख, पढ़ने दो, बढने दो, उडने दो इसको अपने जीवन की उङान।
घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, एसिड अटैक जैसे गंभीर सामाजिक बुराईयो की क्यूँ होती शिकार,
कहते यत्र नारी पूज्यन्ते तत्र देवता रमन्ते,
पूजे जिस देवी को मन्दिर में, फ़िर क्यूँ करते उसका घर और बाहर तिरसकार।
भूल गया इंसानियत और बन गया है आज इंसान हैवान,
पुरुषों के इस समाज में क्यूँ नारी को खोना पढ़ता बार बार अपना आत्मसम्मान,
आखिर कब तक सीता बनकर देगी ये अग्नि परिक्षा, मौन रह कर देगी लाखो बालिदानI
इतिहास गवाह है पर नारी का अपमान करने पर, रची गई रामायण और हुआ महाभारत का महासंग्राम,
ना टिक पाया जब रावण और दुर्योधन का अभिमान।
नारी की यूँ निन्दा करने वालो, मत समझो इनको तुम निर्बल,
इन में है काली और चंडी का बल,
अगर उठा लिया इसने शस्त्र, सोचो क्या होगा तुम्हारा परिणाम ।।
समझो इनकी मन की पीड़ा, अब बंद करो ये अत्याचार,
क्रांति की ज्वाला भड़क गइ तोह, फिर से होगा महासंग्राम,
चीख चीख कर कहती हर नारी, दो हमको सुरक्षित सामाज,
करति हर नारी आज सिर्फ यहि एक माँग,
है नारी महान, करो इनका दिल से सम्मान,
ऐ नारी शक्ति तुम को ह्रदय से शत शत प्रणाम !!