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नारी सशक्तिकरण

Meenakshi Jha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नारी सशक्तिकरण
        
                                                    
                            

फेसबुक पर मित्र बनी
एक अद्भुत षोडशी
प्रोफाइल चित्र में जिसकी
श्री भगवती थी विराजती
पहला संदेश भेजती है कि
गुरु बनो कामोपदेश की
अनुरोध था कि रतिरहस्य के
पृष्ठ पृष्ठ को प्रकाशित करो
कंदर्प दर्पण के हर कोने को
विस्तार से उद्घाटित करो
कहा चार दशकों कि तुम
अनुभवी हो ,परिपक्व हो
तुम ही तो मेरे रिक्त कोश
की पूर्णता की नई कड़ी हो
मन में आया कह दूं उससे
अशिष्ट हो ,वाचाल हो

लज्जाहीनता की साक्षात
तुम प्रतिमान हो
छद्म आधुनिकता की तुम
असफल प्रतिनिधि हो
ऐसा मन ही क्या जो
हवा के झोंके में बह गया
पल के आवेग में इधर उधर
लुढ़क गया ,बहक गया
संस्कार की कड़ी नहीं तो
जीव प्राणहीन है
नए युग की ऐसी जरूरतें
अजीबो-गरीब है

चलो वत्सला तूझे आज
स्वतंत्रता का अर्थ भी सिखला ही दूं
चरित्र निर्माण का गुरु मंत्र भी सीखा ही दूं
आसमय प्रवाह की प्रलय में
सर्वस्व बह जाएगा
धीरज धरो समय के साथ
प्रकाशित सब हो जाएगा
चरित्र निर्माण का नवांकुर
नारी सशक्तिकरण बन जाएगा।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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