अभी अभी तो उतरे हैं मोहब्बत के बाज़ार में ,
धीरे धीरे तो खरीदारी आ ही जाएगी!
थोड़ा तेरी महफिलों में जलील होने तो दे ,
हममें भी कुछ खुद्दारी आ ही जाएगी!
नहीं परवाह हमको इसमे नफा नुकसान का,
पूंजी ना बनी भी तो कुछ उधारी आही जाएगी!
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