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नफरतों का दौर

Md Iftekhar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नफरतों का दौर है ये निकल जायेगा
        
                                                    
                            
हालात मुश्किल हैं ये संभल जायेगा

किसी एक का हुकूमत सदा चलता नहीं
थोड़ी ही दिनों में ये बदल जाएगा

सर पर ताज है तो गुरूर ना कर
एक दिन जमीन तुम्हें निगल जाएगा

मुसीबत कितनी ही बड़ी क्यों ना हो
वक्त के साथ-साथ ये टल जाएगा

नदियों से मिल्लत का ये हुनर सीखो
जाकर दरिया में फौरन मिल जायेगा

उगता हुआ सूर्य का तेवर तो देखो
शाम होते ही ये ढल जायेगा

बुलंदी मिलती है मोहब्बत से इफ्तेखार
नफरत तो नीचे से फिसल जायेगा
-इफ्तेखार
एक घंटा पहले
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